List of Floating Solar Projects in India: भारत में फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स कौन-कौन से है देखें

पूरे भारत में कर रहें हैं फ्लोटिंग सोलर बिजली आवश्यकताओं को पूरा। आइए जानते हैं देश में फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स कौन-कौन से है। यह जानकारी जानने के लिए इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें।

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List of Floating Solar Projects in India: भारत में फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स कौन-कौन से है देखें
List of Floating Solar Projects in India: भारत में फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स कौन-कौन से है देखें

List of Floating Solar Projects in India: देश में बढ़ती जनसंख्या एवं औद्योगीकरण के साथ भारत में ऊर्जा की मांग निरंतर बढ़ती ही जा रही है। पारम्परिक ऊर्जा के जितने भी स्रोत है वे धीरे धीरे करके खत्म होते जा रहें हैं। इसी समस्या को देखते हुए भारत सरकार द्वारा ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों को बढ़ावा दिया जा रहा है। सौर ऊर्जा तथा सोलर पैनलों को लगाकर लोग अपने घर के सभी आवश्यकताओं को पूरा कर रहें हैं। सौर ऊर्जा की इस बढ़ती लोकप्रिय मांग को देखकर तथा सूर्य ऊर्जा का दोहन और नए अभिनव तरीके को विकसित किया जा रहा है। आपको बता दें इन नवीन समाधानों में से एक है फ्लोटिंग सोलर पैनल हैं जिनका उपयोग आजकल तेजी से किया जा रहा है।

फ्लोटिंग सोलर पैनल साधारण पारम्परिक सोलर पैनल के जैसे ही होते हैं, लेकिन ये पानी की सतह पर स्थित होते हैं। जिन लोगों के यहाँ भूमि कमी की समस्या हैं उनके लिए बेस्ट सोलर पैनल ऑप्शन है। क्या आप जानते हैं भारत में फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स कौन कौन से है? अगर नहीं जानते है तो कोई बात नहीं हम आपको इस लेख यह सब जानकारी प्रदान करने जा रहें हैं।

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1. एनटीपीसी फ्लोटिंग सोलर प्लांट रामागुंडम (100 मेगावाट)

एनटीपीसी फ्लोटिंग सोलर प्लांट रामागुंडम, तेलंगाना में स्थित, भारत का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्लांट है। यह एक 100 मेगावाट की क्षमता वाला प्लांट है जो रामागुंडम जलाशय में 500 एकड़ के एरिये में फैला हुआ है। इसमें 40 ब्लॉक विभाजित किए हुए हैं जिनमे 2.5 मेगावाट बिजली का उत्पादन करने के लिए सक्षम होते हैं। वर्ष 2019 में इस प्लांट को शुरू किया गया था।

भारत का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्लांट होने के साथ ही यह अपनी अद्वितीय एवं कुशल डिजाइन के लिए जाना जाता है। आपको बता दें सभी विद्युत उपकरणों का फ्लोटिंग फेरो सीमेंट प्लेटफॉर्म पर स्थापित होना इस परियोजना की सबसे उल्लेखनीय विशेषता मानी जाती है। यह प्लेटफॉर्म डेड-वेट कंक्रीट ब्लॉकों द्वारा सर्मथित होता है जो जलाशय की सतह पर तैरता है।

इसके कई लाभ हैं-

  • फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म बिजली के उपकरणों को ठंडा करने में सहायक होते हैं, इसलिए इनकी दक्षता में सुधार आता है।
  • प्लेटफॉर्म को स्थिर रखने के लिए डेड-वेट कंक्रीट ब्लॉकों का उपयोग किया जाता है।
  • यह सोलर पैनल जलाशय की सतह पर स्थापित रहते हैं जिससे पानी के वाष्पीकरण होने में कमी आती है। पानी बचत करने में बहुत ही बेहतर होता है।
  • कम वाष्पीकरण होने के कारण जलाशय का जो जल स्तर होता है वह अधिक रहता है।

2. एनटीपीसी फ्लोटिंग सोलर प्लांट कायमकुलम (92 मेगावाट)

भारत सरकार द्वारा ऊर्जा स्वतंत्रता की ओर से एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है यह एक 92 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर पावर नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) का राजीव गांधी कम्बाइंड साइकिल पावर प्लांट है। स्वच्छ ऊर्जा निर्माण करने के साथ यह ऊर्जा सुरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक है।

इस संयंत्र का अंतिम चरण जुलाई 2022 में ऑनलाइन किया गया था। यह संयंत्र 22 0कवि जीआईएस सबस्टेशन का इस्तेमाल करके केरल राज्य बिजली बोर्ड को बिजली की आपूर्ति करता है। इस परियोजना के कार्यान्वयन की लागत 465 करोड़ रूपए है। फ्लोटिंग पर करीबन 2.16 लाख सोलर पैनल लगाए जाएंगे।

3. रिहंद बांध फ्लोटिंग सौर ऊर्जा संयंत्र (50 मेगावाट)

रिहंद बांध फ्लोटिंग सौर ऊर्जा संयंत्र उत्तर प्रदेश राज्य के रिहंद जलाशय पर स्थित है। जो सम्पूर्ण सजी को ऊर्जा प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना मानी जाती है। यह जो परियोजना है इसकी कुल क्षमता 50 मेगावाट तक है।

परियोजना के तहत ऊर्जा उत्पादन तो किया ही जाता है साथ ही यह ऊर्जा सुरक्षा एवं पर्यावरण को भी संरक्षित करती है। यह 25 साल की अवधि के बिजली खरीदे समझौते के साथ, राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में अपनी आवश्यक भूमिका निभा रही है। यह किफायती और आकर्षक है जिसमें 00.44kWh प्रति kWh की बिजली की कीमत, खरीदार एवं विक्रेता के लिए आदर्श बनती है।

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यह फ्लोटिंग सोलर प्लांट स्वच्छ ऊर्जा का निर्माण करने के साथ ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को भी कम करने के सहायक होती है। परियोजना के तहत शहरी एवं ग्रामीण इलाकों की बिजली जरुरत को पूरा किया जा रहा है।

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4. सिम्हाद्री फ्लोटिंग सोलर पीवी परियोजना (25 मेगावाट)

सिम्हाद्री फ्लोटिंग सोलर पीवी परियोजना आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में स्थित है यह देश की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर पीवी परियोजना है। यह पीवी परियोजना 25 मेगावाट क्षमता की है जो नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (NTPS) द्वारा विकसित की गई है।

यह देश में नवीकरणीय ऊर्जा के विकास को बढ़ाने में सहायक हुई है। एनटीपीसी सिम्हाद्री सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट के कच्चे पानी के जलाशय में स्थित है जो सालाना 55.11 मिलियन यूनिट ऊर्जा उत्पादन करने तथा 47.5 मीट्रिक टन CO2 उत्सर्जन की बचत करती है।

यह परियोजना बिजली उत्पादन के साथ भारत में फ्लोटिंग सोलर ऊर्जा को विकसित कर रही है। वर्ष 2019 में इस परियोजना को मेसर्स बीएचईएल को सौंपा गया, ईपीसी मॉडल के तहत, इसने क्रियान्वयन करके सफलता सुनिश्चित की।

जलाशय में सोलर पैनलों को मजबूत एवं दृढ़ रखकर सुरक्षा प्रदान करती है। यह परियोजना एक लाख से अधिक सोलर पीवी मॉड्यूल से बनी हुई 75 एकड़ में फैली हुई है।

इससे 7,000 घरों को बिजली मिलती है साथ ही प्रत्येक वर्ष 1,364 मिलियन लीटर पानी की भी बचत होती है। इससे हजारों घरों की पानी की आवश्यकता पूरी होती है।

5. चंडीगढ़ में 2 मेगावाट फ्लोटिंग और ऊर्जा संयंत्र

चंडीगढ़ में 2 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट शहर का पहला एवं उत्तर का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट है। यह बिजली चंडीगढ़ के बिजली ग्रिड में आपूर्ति की जाती है। सेक्टर 39 वाटर वर्क्स में यह सोलर प्लांट स्थापित किया हुआ है इससे हर साल 28,00,000 यूनिट बिजली पैदा की जाती है।

इस परियोजना के तहत नवीकरणीय ऊर्जा का निर्माण कराने के लिए सोलर पैनल जलाशय की सतह पर लगाए जाते हैं। सोलर पैनल से बिजली का निर्माण होने के अतिरिक्त इस परियोजना के कई फायदे हैं। पानी की सतह पर स्थापित होकर ये पानी में होने वाली वाष्पीकरण प्रक्रिया को बहुत कम कर देते हैं। यह इसका मुख्य फायदा है जिससे कई मिलियन लीटर में पानी की बचत होती है।

पानी का जो ठंडा प्रभाव होता है उससे सौर पैनल की दक्षता भी अधिक बढ़ती है तथा साधारण सौर ऊर्जा की तुलना में अधिक बिजली का निर्माण होता है। यह फ्लोटिंग सोलर पैनल टिकाऊ ऊर्जा प्रदान करने के साथ पर्यावरण को सुरक्षा प्रदान करते हैं।

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