सोलर इन्वर्टर और सोलर पीसीयू में अंतर

सोलर इन्वर्टर और सोलर पीसीयू (पावर कंडीशनिंग यूनिट) दोनों सौर ऊर्जा प्रणालियों के महत्वपूर्ण घटक हैं, लेकिन उनके कार्य और विशेषताएं भिन्न होती हैं।

Published By SOLAR DUKAN

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सौर ऊर्जा के प्रयोग के बिजली उत्पादन करने के लिए सोलर उपकरणों का अधिक से अधिक प्रयोग किया जा रहा है। इस प्रकार निर्मित की जाने वाली बिजली से पर्यावरण के अनुरूप बनती है। इस से किसी प्रकार का कोई प्रदूषण उत्पन्न नहीं होता है। पर्यावरण के प्रति जागरूक एवं बिजली की बचत करने वाले नागरिक सोलर उपकरणों को स्थापित करते हैं। इस से वे कार्बन फुटप्रिन्ट को कम करने में सहायक बनते हैं।

इस आर्टिकल के द्वारा आप सोलर इन्वर्टर और सोलर पीसीयू में अंतर (Difference between Solar Inverter and Solar PCU) की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इंवर्टर विद्युत कन्वर्टर का कार्य करते हैं, यह DC (दिष्ट धारा) को AC (प्रत्यावर्ती धारा) में परिवर्तित करते हैं। सोलर इंवर्टर एवं सोलर पीसीयू की जानकारी प्राप्त कर आप यह जान सकते हैं कि इनमें से कौन घरेलू उपयोग के लिए अच्छा है।

सोलर इन्वर्टर और सोलर पीसीयू में अंतर
सोलर इन्वर्टर और सोलर पीसीयू में अंतर

सोलर इन्वर्टर

सोलर इंवर्टर (Solar Inverter) एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो सोलर पैनल से प्राप्त होने वाली दिष्ट धारा (Direct Current DC) को प्रत्यावर्ती धारा (Alternative Current AC) में परिवर्तित करने का कार्य करती है। सोलर इंवर्टर को PV इंवर्टर भी कहा जाता है। जैसे सामान्य इंवर्टर ग्रिड से आने वाले बिजली की सहायता से बैटरी चार्ज करते हैं वैसे ही सोलर इंवर्टर निम्न तीन स्रोतों से बिजली प्राप्त कर सकते हैं:

  • ग्रिड से प्राप्त होने वाली बिजली
  • सौर पैनल से प्राप्त होने वाली बिजली
  • बैटरी से प्राप्त होने वाली बिजली

सोलर पैनल आवश्यकता के अनुसार इन तीनों का प्रयोग करते हैं। ये ग्रिड की बिजली होने के समय उसका प्रयोग कर संचालित हो कर बैटरी चार्ज करते हैं, ग्रिड की बिजली जाने के पर ये सौर पैनल की बिजली का प्रयोग कर बैटरी चार्ज करते हैं एवं जब यह दोनों ही उपलब्ध नहीं होते हैं तो यह बैटरी में संग्रहीत की गई बिजली का प्रयोग करते हैं। सोलर इंवर्टर मुख्य रूप से PWM (Pulse Width Modulation) एवं MPPT (Maximum Power Point Tracking) तकनीक के बने होते हैं। सोलर इंवर्टर 3 से 5 किलोवाट तक के बिजली के लोड वाले आवासों में प्रयोग किए जा सकते हैं। इनके द्वारा घरों में प्रयोग किए जाने वाली सभी उपकरणों को चलाया जा सकता है।

सोलर पीसीयू

सोलर पीसीयू (Solar PCU) को Power Conditioning Unit कहते हैं। सोलर PCU मानक सोलर इंवर्टर से अधिक उन्नत होते हैं। इनमें सोलर इंवर्टर की तुलना में अधिक एडवांस फीचर्स प्राप्त होते हैं। इसलिए ही इनका प्रयोग अधिक क्षमता के सोलर सिस्टम में किया जाता है। सोलर PCU MPPT (Maximum Power Point Tracking) तकनीक पर कार्य करते हैं। जबकि अधिकांश सोलर इंवर्टर PWM तकनीक पर कार्य करते हैं।

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MPPT तकनीक पर कार्य करने वाले सोलर पीसीयू की दक्षता PWM तकनीक पर कार्य करने वाले सोलर इंवर्टर की तुलना में 30% अधिक होती है। इसका अर्थ यह होता है कि सोलर पीसीयू अधिक तेजी से बैटरी को चार्ज करती है। एवं सौर पैनलों से प्राप्त होने वाली बिजली को अधिक प्रयोग करते हैं। इन्हें अलग-अलग मोड पर चलाया जा सकता है। सोलर पीसीयू मुख्य रूप से तीन मोड में प्रयोग किए जा सकते हैं:

  • PCU Mode- इस मोड की प्राथमिकता सौर पैनल से प्राप्त होने वाली बिजली का प्रयोग करना है। इस मोड के द्वारा उपभोक्ता सोलर एनर्जी का पूर्ण प्रयोग कर सकते हैं।
  • Hybrid Mode- इस मोड में प्राथमिकता ग्रिड से प्राप्त होने वाली बिजली पर रहती है। उसके बाद सोलर पैनल एवं बैटरी की बिजली का प्रयोग किया जाता है। इस मोड का सर्वाधिक प्रयोग बैटरी चार्ज करने में किया जाता है।
  • Smart Mode- इस मोड की प्राथमिकता सोलर पैनल पर ही रहती है। साथ ही इस मोड में ग्रिड की बिजली का प्रयोग भी किया जा सकता है।

सोलर इन्वर्टर और सोलर पीसीयू में अंतर

सोलर इन्वर्टर और सोलर पीसीयू में अंतर में अंतर निम्न कारकों के आधार पर किया जा सकता है:

कारक सोलर इंवर्टर सोलर पीसीयू
बैटरी सोलर इंवर्टर का अधिकांश प्रयोग आवासों में किया जाता है, यह कम लोड को संचालित करने में प्रयोग किए जाते हैं। यह उस स्तर तक की बैटरी का प्रयोग ही करता है।सोलर पीसीयू का प्रयोग बड़े सोलर सिस्टम में किया जाता है। यह अधिक बैटरी में विद्युत को संग्रहीत करता है। सोलर इंवर्टर की तुलना में अधिक तेजी से बैटरी चार्ज करते हैं।
तकनीक यह PWM एवं MPPT तकनीक के बने होते हैं पर अधिकांशतः PWM का ही प्रयोग किया जाता है।यह MPPT तकनीक के ही बने होते हैं। MPPT तकनीक PWM से 30% अधिक दक्षता रखती है।
कीमत सोलर इंवर्टर की कीमत इसकी उपयोगिता के अनुसार कम है।सोलर पीसीयू की कीमत अधिक होती है, क्योंकि यह उच्च तकनीक से बने होते हैं, एवं अनेक फीचर्स इनमें प्राप्त होते हैं।
सुरक्षा सुविधाएं इसमें सेफ़्टी के लिए MCB एवं फ्यूज प्रदान किए जाते हैं।इसमें प्रत्येक उपकरण के लिए अलग MCB प्रदान की गई होती है, साथ ही इंडिकेटर डिस्प्ले पर दिखाई देते हैं।
फीचर्स सोलर इंवर्टर में सोलर पीसीयू की तुलना मे बहुत कम फीचर्स होते हैं। यह कार्यक्षमता में सरल होते हैं।यह तीन मोड में कार्य करता है। साथ ही इनपुट/आउटपुट विवरण को देखने के लिए इसमें डिस्प्ले दी गई होती है।

आप अपनी आवश्यकता के अनुसार इनका चयन कर सकते हैं। यदि आप ऐसे क्षेत्र में रहते हैं जहां बिजली की अधिक कटौती होती है तो आप वहाँ सोलर पीसीयू को लगा सकते हैं। सोलर इंवर्टर आवासों के लिए पहली पसंद है। क्योंकि यह कम लोड के उपकरण को आसानी से संचालित कर सकते हैं, जबकि सोलर पीसीयू बड़े-बड़े सोलर सिस्टम के साथ ही लगाया जाता है। सौर पीसीयू का निर्माण अधिक सौर ऊर्जा का प्रयोग करने के लिए किया गया है। इन दोनों की कीमतों के आधार पर, इन्हें निर्मित करने वाले ब्रांड के आधार पर आप किसी को भी स्थापित कर सकते हैं।

निष्कर्ष

सोलर इंवर्टर एवं सोलर पीसीयू के अंतरों की जानकारी प्राप्त करने के बाद उपभोक्ता आसानी से अपनी आवश्यकता के अनुसार इनका प्रयोग कर सकते हैं। दोनों का प्रयोग ही घरेलू उपकरणों को संचालित करने में किया जा सकता है। अधिक फीचर्स, अधिक दक्षता के साथ सोलर पीसीयू का प्रयोग करने को कहा जाता है, जबकि कम लोड के लिए कम कीमत के सोलर इंवर्टर का प्रयोग भी किया जा सकता है। सोलर उपकरणों का प्रयोग करने से आप पर्यावरण में किसी प्रकार के प्रदूषण को उत्पन्न नहीं करते हैं। ये सभी ईको-फ़्रेंडली होते हैं।

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सामान्य इन्वर्टर को सोलर इन्वर्टर कैसे बनाएं

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