Solar Panel: कौन सा सोलर पैनल अच्छा रहता है? कौन सा लगाएं

घर की बिजली आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आजकल लोग घर की छत पर सोलर पैनल लगाना अत्यधिक पसंद कर रहें हैं। इससे लोगों को बिजली बिल से छुटकारा मिल रहा है। आइए जान लेते हैं सबसे फायदेमंद सोलर पैनल कौन से हैं।

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Solar Panel: कौन सा सोलर पैनल अच्छा रहता है? कौन सा लगाएं
Solar Panel: कौन सा सोलर पैनल अच्छा रहता है? कौन सा लगाएं

Solar Panel: क्या आप अपने घर पर सोलर पैनल लगवाना चाहते हैं? लेकिन आपके मन में यह सवाल अवश्य होगा कि आपको कौन सा सोलर पैनल खरीदना चाहिए। क्योंकि यह जानकारी जानना आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अगर आप अपने घर में बेहतर क्षमता वाल सोलर पैनल लगाना चाहते हैं तो बेहतरीन एवं कुशल तरीक से काम करें तो आपके लिए बाईफेशियल सोलर पैनल एक अच्छा ऑप्शन है। तो चलिए जान लेते हैं इस खास सोलर पैनल के बारे में, कि इसे कैसे लगाया जाता है और इसे लगाने में कितना खर्चा आता है? अतः आप इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

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बाईफेशियल सोलर पैनल क्या है?

बाईफेशियल सोलर पैनल एक प्रकार का सोलर पैनल है जो सूरज की रोशनी प्राप्त करके बिजली का उत्पादन करता है। दुनिया में इस सोलर पैनल को बेहतर टेक्नोलॉजी का सोलर पैनल कहा जाता है। इनके पैनलों पर दो सक्रिय सतहें होती हैं, एक आगे की ओर तथा एक पीछे की ओर। जब सूर्य कर प्रकाश इसमें पड़ता है दो दोनों सतहें इसे अवशोषित करती हैं। नॉर्मल सोलर पैनल के मुकाबले यह बिजली उत्पादन अधिक करता है।

Bifacial solar panel कैसे करता है काम?

यह सोलर पैनल अन्य सोलर पैनल की तरह ही सूरज के प्रकाश को ग्रहण करके बिजली का उत्पादन करता है। लेकिन इसकी खास बात यह है कि जो इसमें सोलर सेल लगे रहते हैं वह पारदर्शी होते हैं। जब सूरज की रोशनी इन सोलर पैनल में पड़ती है तो वह आर पार हो जाती है और ये रोशनी पीछे की सतह से लकरकर वापस पैनल पर पड़ जाती हैं। ये सोलर पैनल पिछले हिस्से से भी बिजली का निर्माण करता है।

क्या बाईफेशियल सोलर पैनल दोनों तरफ से देता है बराबर बिजली?

जी नहीं, यह solar panel दोनों तरफ से एक समान बिजली का उत्पादन नहीं करता है। यह पैनल आगे की ओर से 90% से 100% बिजली कर निर्माण करता है तो पीछे की तरफ से 25 से 30% तक बिजली का निर्माण करता है।

कितनी होती है इसकी कार्य क्षमता?

Bifacial solar panel की कार्य क्षमता की जानकारी दें, तो भारतीय बाजार में जितने भी तरह के सोलर पैनल बेचे जा रहें हैं उनकी तुलना में इसकी कार्य क्षमता अधिक है। इस सोलर पैनल की जो क्षमता है वह करीबन 27 प्रतिशत तक होती है। दोनों साइड से बिजली निर्माण करने के कारण यह पैनल 5 से 30 प्रतिशत से ज्यादा बिजली बना सकता है। मोनोक्रिस्टलाइन सोलर पैनल की एफशिएंसी 20 से 22% तक होती है जबकि पोलीक्रिस्टलाइन सोलर पैनल की कार्य क्षमता 15 से 17% तक होती है।

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क्या है इसके फायदे?

– बाईफेशियल सोलर पैनल का फायदा पैनल की पिछली या निचली सतह के पर निर्भर करता हैं, कि आप इस पैनल को कहां लगाने जा रहे हैं। सतह के अनुसार बिजली बनाता है यह पैनल। यदि आप इस पैनल को पानी के ऊपर लगाते हैं तो यह 7 प्रतिशत ज्यादा अर्थात 470 वाट तक बिजली का निर्माण होता है।

अगर घास के ऊपर लगाया जाता है तो 485 वाट अर्थात 10%, रेत के ऊपर लगाने पर 15% अर्थात 505, कंक्रीट ग्राउंड के ऊपर 13% (495 वाट) तथा सोलर पैनल को वाइट कोटिड ग्राउंड के ऊपर स्थापित करते हैं तो इसमें सबसे अधिक बिजली का निर्माण होता है यह करीबन 20 प्रतिशत यानी 530 वाट तक होता है। कम जगह पर स्थापित होकर यह आपके घर को बिजली प्रदान करता है।

बाईफेशियल सोलर पैनल की कितनी है कीमत?

बाईफेशियल सोलर पैनल सौर ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांति लाने वाली बेहतर एवं कुशल नई कंपनी है। यह तकनीक पारम्परिक सोलर पैनल से अधिक कुशल एवं लागत प्रभावी साबित है। यह पारम्परिक सोलर पैनल की तुलना में थोड़े अधिक महंगे हैं अतः इनकी कीमत 28 रूपए से 30 रूपए प्रति वाट है।

घर में बिजली के लिए कितने सोलर पैनलों की होगी जरुरत

जानकारी किए लिए आपको बताएं बाईफेशियल सोलर का एक ही पैनल 500 वाट से भी अधिक बिजली का निर्माण करता है। जिसके साथ यह 150AH की बैटरी को भी पूरा चार्ज कर देता है। जिन लोगों ने अपने घर पर एक इन्वेर्टर और एक बैटरी का सिस्टम स्थापित किया है वे अपने घर हे सभी उपकरण आसानी से चला सकते हैं।

बाईफेशियल सोलर पैनल के निर्माता कौन-कौन हैं?

भारत देश में बहुत सारी कंपनियां हैं जो बाईफेशियल सोलर पैनल का निर्माण करती हैं। इनमें से ही भारत की एक प्रसिद्ध लूम सोलर कंपनी है जो बाईफेशियल सोलर पैनल बनाती है।

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