अब कोहरे में भी बनेगी बिजली! जानें ‘बाईफेशियल’ और ‘हाफ-कट सेल’ जैसी नई सोलर टेक्नोलॉजी के बारे में जो सर्दियों के लिए हैं बेस्ट

ऊर्जा के क्षेत्र में नवीनतम तकनीकी उन्नयन ने सौर ऊर्जा उत्पादन की चुनौतियों को काफी हद तक कम कर दिया है, अब ऐसे सोलर पैनल उपलब्ध हैं जो न केवल सीधी धूप में, बल्कि कोहरे वाली सुबह और कम रोशनी की स्थिति में भी प्रभावी ढंग से बिजली पैदा कर सकते है

Published By Rohit Kumar

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अब कोहरे में भी बनेगी बिजली! जानें 'बाईफेशियल' और 'हाफ-कट सेल' जैसी नई सोलर टेक्नोलॉजी के बारे में जो सर्दियों के लिए हैं बेस्ट
अब कोहरे में भी बनेगी बिजली! जानें ‘बाईफेशियल’ और ‘हाफ-कट सेल’ जैसी नई सोलर टेक्नोलॉजी के बारे में जो सर्दियों के लिए हैं बेस्ट

ऊर्जा के क्षेत्र में नवीनतम तकनीकी उन्नयन ने सौर ऊर्जा उत्पादन की चुनौतियों को काफी हद तक कम कर दिया है, अब ऐसे सोलर पैनल उपलब्ध हैं जो न केवल सीधी धूप में, बल्कि कोहरे वाली सुबह और कम रोशनी की स्थिति में भी प्रभावी ढंग से बिजली पैदा कर सकते है, ‘बाईफेशियल’ और ‘हाफ-कट सेल’ जैसी नई प्रौद्योगिकियां विशेष रुप से सर्दी के मौसम में सौर ऊर्जा प्रणाली की दक्षता बढ़ाने के लिए गेम-चेंजर साबित हो रही हैं। 

बाईफेशियल सोलर पैनल 

पारंपरिक सोलर पैनल केवल अपनी ऊपरी सतह पर पड़ने वाले सूर्य के प्रकाश को ही बिजली में बदलते हैं। इसके विपरीत, बाईफेशियल पैनल एक क्रांतिकारी बदलाव पेश करते हैं। 

  • इन पैनलों में आगे और पीछे, दोनों तरफ प्रकाश-संवेदनशील सौर सेल लगे होते हैं। पैनल का अगला हिस्सा सीधे सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करता है, जबकि पिछला हिस्सा जमीन, छत या आस-पास की सतहों से परावर्तित (रिफ्लेक्टेड) होने वाली रोशनी को पकड़ता है।
  •  सर्दियों के दौरान, यदि जमीन पर बर्फ या कोई परावर्तक सतह है, तो ये पैनल अतिरिक्त ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। सही इंस्टॉलेशन के साथ, ये पारंपरिक पैनलों की तुलना में 5% से 30% तक अधिक बिजली बना सकते हैं, जिससे कोहरे या बादल छाए रहने पर भी उत्पादन में स्थिरता आती है। 

हाफ-कट सेल टेक्नोलॉजी

यह तकनीक पैनल की समग्र दक्षता और प्रदर्शन को बेहतर बनाने पर केंद्रित है, खासकर जब पैनल के कुछ हिस्से छाया में हों।

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  • इस तकनीक में, मानक आकार के सोलर सेल को उच्च-सटीकता वाली लेजर कटिंग के माध्यम से आधा काट दिया जाता है। इससे पैनल में सेल की संख्या दोगुनी हो जाती है (उदाहरण के लिए 60 सेल की जगह 120 हाफ-कट सेल)।
  • सेल का आकार आधा होने से उनमें से बहने वाली विद्युत धारा (करंट) की मात्रा कम हो जाती है, कम करंट का मतलब है कम प्रतिरोधक हानि (Resistive Losses), जिससे पैनल अधिक ठंडा रहता है और उसकी दक्षता बढ़ती है।
  • सर्दियों में अक्सर कुछ हिस्सों में छाया पड़ने की समस्या होती है, हाफ-कट सेल तकनीक में, यदि पैनल का एक हिस्सा छाया में है, तो भी बाकी हिस्से बिना अधिक प्रभाव के काम करते रहते हैं, जिससे बिजली उत्पादन जारी रहता है। 

ये दोनों प्रौद्योगिकियां मिलकर सौर ऊर्जा प्रणालियों को खराब मौसम और कम धूप की स्थिति में भी अत्यधिक प्रभावी बनाती है, यदि आप सर्दियों के महीनों में भी बिजली बिल पर निर्भरता कम करना चाहते हैं, तो ‘बाईफेशियल’ और ‘हाफ-कट सेल’ तकनीक वाले सोलर पैनल स्थापित करना एक स्मार्ट और भविष्यवादी निर्णय साबित हो सकता है।

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