सोलर पैनल बनाने की प्रक्रिया जानें

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किसी भी सोलर सिस्टम में सबसे महत्वपूर्ण उपकरण सोलर पैनल होते हैं। सोलर पैनल के द्वारा सूर्य से प्राप्त होने वाली सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा के रूप परिवर्तित किया जाता है। यह बिजली को दिष्ट धारा के रूप में बनाते हैं। सोलर पैनल बनाने की प्रक्रिया की जानकारी आप प्राप्त कर सकते हैं, एवं इसका प्रयोग घरों के बड़े उपकरणों को चलाने में इंवर्टर की सहायता से किया जाता है, क्योंकि इंवर्टर द्वारा दिष्ट धारा DC को प्रत्यावर्ती धारा AC के रूप में परिवर्तित किया जाता है। वर्तमान समय में सोलर पैनल एडवांस तकनीक में उपलब्ध हो गए हैं।

इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको सोलर पैनल बनाने की प्रक्रिया (how are solar panels manufactured) की जानकारी प्रदान करेंगे। इसमें किस प्रकार के छोटे उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। एवं सोलर पैनल का निर्माण करने वाले विभिन्न घटकों को कैसे इकट्ठा किया जाता है, यह सभी जानकारी आप इस लेख के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। एक बार सोलर सिस्टम को स्थापित करने के बाद आप लंबे समय तक मुफ़्त में बिजली को प्राप्त कर सकते हैं।

सोलर पैनल बनाने की प्रक्रिया जानें
सोलर पैनल कैसे बनाए जाते हैं?

इस लेख में देखें

सोलर पैनल बनाने की प्रक्रिया

सोलर पैनल के निर्माण की प्रक्रिया को अलग-अलग स्टेप के माध्यम से समझा जा सकता है, जो इस प्रकार हैं:

  1. भिन्न-भिन्न वाट क्षमता के सोलर पैनल के अनुसार सेल को लेजर कटिंग मशीन की सहायता से काटा जाता है, फुल सेल साइज़ के पैनल के लिए यह प्रक्रिया नहीं की जाती है।
  2. इसके बाद सोलर सेल को जोड़ या सोल्डर कर दिया जाता है, जिसे स्ट्रिंगिंग प्रक्रिया कहा जाता है, यह एक औटोमेटिक प्रक्रिया होती है, इसमें सूर्य के प्रकाश की ओर नीला/काला भाग जो नेगेटिव होता है उसे रखा जाता है, एवं पृष्ठ भाग को सफेद रखा जाता है जो पाज़िटिव भाग होता है।
  3. जब सेल को जोड़ दिया जाता है तो इन्हें मजबूत ग्लास में परिवर्तित कर दिया जाता है, इन पर EVA (एथिलीन विनाइल एसीटेट) की एनकैप्सूलएशन लेयर होती है। जो इन्हें सुरक्षित बनाए रखती है। इस के बाद इसमें दोष या त्रुटि की के लिए सेल की जांच की जाती है। टेक्नीशियन द्वारा सेल को टैप किया जाता है।
  4. इसके बाद सोलर सेल को एक क्रम में जोड़ दिया जाता है, एवं इसमें रहने वाली अतिरिक्त सामग्रियों को काट दिया जाता है। पैनल को नमी एवं धूल से बचाने के लिए EVA एनकैप्सूलएशन और बैक-शीट का प्रयोग कर क्रम के कनेक्शन को इंसुलेट कर दिया जाता है।
  5. बैक शीट और ईवीए एनकैप्सुलेशन का उपयोग करके कनेक्शनों को इन्सुलेट करना शामिल है। यह प्रक्रिया मॉड्यूल को किसी भी धूल और नमी से बचाती है। इसके बाद EI परीक्षण किया जाता है, जिसमें EI मशीन में पैनल/मॉड्यूल को स्कैन किया जाता है। यदि किसी भी प्रकार की त्रुटि दिखती है तो पैनल को वापस भेज दिया जाता है।
  6. EI परीक्षण के सफल परीक्षण के बाद माड्यूल को लेमिनेट किया जाता है, जिसमें उसे 130 डिग्री सेल्सियस से अधिक ताप पर लेमिनेट किया जाता है। एवं उसके लगभग 30 मिनट बाद माड्यूल को ठंड होने के लिए छोड़ दिया जाता है। इसके बाद सोलर पैनल की बैकशीट में अतिरिक्त सामग्री को ट्रिम कर दिया जाता है।
  7. पैनलों को फिक्स विभिन्न आकार के फ्रेम में काटा जाता है। इसके बाद पैनल को माउंट करने या ग्राउंडिंग करने के लिए उनमें फ्रेम पंचिंग की जाती है। फिर पैनल को नमी या धूल से बचाने के लिए सिलेंट फ्रेमिंग का प्रयोग किया जाता है। एवं इसकी जांच की जाती है।
  8. जंक्शन बॉक्स को सुरक्षित रूप से जोड़ने के लिए सिलेंट का प्रयोग किया जाता है, जिस से यह मजबूती से जुड़ा रहे, इसके बाद सभी कनेक्शन को सोल्डर कर दिया जाता है। एवं कुछ घंटे मजबूत होने के लिए छोड़ दिया जाता है। इसके बाद निर्मित मॉड्यूल को बाह्य रूप से साफ किया जाता है।

इस प्रकार इस सोलर पैनल का निर्माण किया जाता है, इसके बाद भी यह सीधा उपलब्ध नहीं होता है, इसका परीक्षण किया जाता है। एवं सफल होने पर यह यह आगे बाजारों में उपलब्ध हो सकता है।

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सोलर पैनल का परीक्षण

सोलर पैनल का निर्माण होने के बाद इसके सभी मापदंडों का परीक्षण किया जाता है, सोलर पैनल के आउटपुट करंट, वोल्टेज एवं पावर आदि की जांच की जाती है, जो पैनल इस परीक्षण में पास होते हैं, उन्हें आगे भेज कर उनकी रेटिंग से संबंधित टेपिंग की जाती है, एवं पैनल के पिछले भाग में उसे चिपका दिया जाता है। इसके बाद भी सोलर पैनल के प्रतिरोध, भार सहित अन्य परीक्षण किए जाते हैं। सफल परीक्षण के बाद ही मॉड्यूल की सुरक्षा के लिए उसकी पैकेजिंग की जाती है। जो पैनल परीक्षण में पास नहीं होते हैं उन्हें वापस विनिर्माण में भेजा जाता है।

निष्कर्ष

इस प्रकार उपर्युक्त लेख के माध्यम से आप यह जान गए होंगे कि सोलर पैनल बनाने की प्रक्रिया किस प्रकार की जाती है, सोलर पैनल का सबसे महत्वपूर्ण भाग फोटो-वोल्टिक सेल ही होते हैं, जिनके द्वारा सबसे मुख्य कार्य सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने का किया जाता है। उपर्युक्त सोलर पैनल की निर्माण प्रक्रिया विश्वसनीय एवं प्रसिद्ध उच्च ब्रांड में ही होती है। नकली क्षमता के सोलर पैनल में सावधानियों का ध्यान नहीं रखा जाता है।

इसलिए यदि आप जब भी सोलर पैनल खरीदें तो किसी विश्वसनीय ब्रांड के ही सोलर पैनल का प्रयोग करें, आप सोलर पैनल खरीदने से पूर्व किसी विशेषज्ञ सलाहकार की सहायता प्राप्त कर सकते हैं। सोलर सिस्टम को स्थापित कर आप पर्यावरण को सुरक्षित रखने में भी सहायता प्रदान करते हैं, क्योंकि इस सिस्टम के द्वारा किसी प्रकार का कोई प्रदूषण उत्पन्न नहीं होता है। ग्रिड के बिजली बिल में आप छूट प्राप्त कर सकते हैं।

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