Green Hydrogen: अडानी-रिलायंस के बाद अब ये 3 छोटी कंपनियां बदलेंगी गेम! हाइड्रोजन एनर्जी में निवेश का ये है सही मौका।

अडानी-रिलायंस के बाद ये 3 छोटी कंपनियां गेम बदल देंगी। कम पैसे लगाकर मोटा मुनाफा कमाने का सही मौका! अभी पढ़ें कौन सी हैं ये कंपनियां और कैसे बनें अमीर। जल्दी करें, वरना मौका हाथ से निकल जाएगा!

Published By Rohit Kumar

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भारत का ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र तेजी से उभर रहा है, जहां अडानी और रिलायंस जैसे बड़े समूह भारी निवेश कर चुके हैं। नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत 2030 तक 5 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य है, जिसमें छोटी कंपनियां अब अहम भूमिका निभा रही हैं। ये कंपनियां इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण और उत्पादन में नवाचार ला रही हैं, जो निवेशकों के लिए बड़ा अवसर पैदा कर रही हैं। हाइड्रोजन एनर्जी में निवेश का सही समय आ गया है, क्योंकि सरकारी सब्सिडी और वैश्विक मांग से ये क्षेत्र बूम पर है।

ग्रीन हाइड्रोजन का बढ़ता महत्व

ग्रीन हाइड्रोजन पानी के इलेक्ट्रोलिसिस से रिन्यूएबल ऊर्जा पर बनाया जाता है, जो कार्बन उत्सर्जन मुक्त है। भारत सरकार ने SIGHT प्रोग्राम के जरिए 15,000 MW इलेक्ट्रोलाइजर क्षमता के लिए 45,000 करोड़ रुपये की सहायता दी है। बड़े खिलाड़ियों के बाद छोटी फर्में जैसे ओह्मियम, L&T ग्रीन एनर्जी कांडला और रिन्यू पावर तेजी से आगे आ रही हैं। ये कंपनियां कम लागत पर उत्पादन बढ़ा रही हैं और निर्यात के अवसर तलाश रही हैं। नतीजतन, ग्रीन हाइड्रोजन की कीमत ग्रे हाइड्रोजन से प्रतिस्पर्धी हो रही है, जो उद्योगों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।

ओह्मियम

ओह्मियम इंटरनेशनल ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में सबसे तेज बढ़ने वाली छोटी कंपनी है। इसने पहले ही 2,000 MW क्षमता वाला प्लांट चालू कर दिया है और 2026 तक उत्पादन दोगुना करने की योजना है। सरकारी टेंडर जीतकर ये कंपनी गुजरात और अन्य राज्यों में फैल रही है। ओह्मियम की ताकत इसकी अमेरिकी तकनीक और भारतीय उत्पादन क्षमता में है, जो इसे बड़े प्रतिस्पर्धियों से अलग करती है। निवेशक इसकी ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा कर सकते हैं, क्योंकि ये निर्यात बाजारों में भी कदम रख रही है।

L&T ग्रीन एनर्जी कांडला

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लार्सन एंड टूब्रो की सब्सिडियरी L&T ग्रीन एनर्जी कांडला (LTGEK) गुजरात के हजीरा में 45 किलो प्रतिदिन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादित कर रही है। इसने IOCL की पनिपत रिफाइनरी के लिए 10,000 टन सालाना आपूर्ति का 25 साल का अनुबंध जीता है। ओडिशा में नया प्रोजेक्ट और गुजरात में ग्रीन अमोनिया प्लांट भी शुरू हो चुके हैं। L&T की इंजीनियरिंग ताकत इसे छोटी कंपनी होने के बावजूद बड़े प्रोजेक्ट्स दिला रही है। ये कंपनी रिफाइनरी इंटीग्रेशन पर फोकस कर रही है, जो लंबे समय तक स्थिर आय सुनिश्चित करेगी।

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रिन्यू पावर

रिन्यू पावर भारत की कुल सोलर-विंड क्षमता का 1.9% हिस्सा रखती है और ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स में साझेदारियां मजबूत कर रही है। ये कंपनी हाइड्रोजन हब विकसित करने पर काम कर रही है, जहां रिन्यूएबल एनर्जी से सीधा उत्पादन होगा। रिन्यू की रणनीति सस्टेनेबल पार्टनरशिप्स पर आधारित है, जो इसे छोटी लेकिन फुर्तीली बनाती है। 2026 तक इसके प्रोजेक्ट्स बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर देंगे, जो शेयर मूल्य में उछाल लाएंगे।

निवेश का सुनहरा मौका क्यों?

नेशनल मिशन से 8,000 अरब रुपये का निवेश आएगा, जिसमें छोटी कंपनियां 20-30% रिटर्न दे सकती हैं। ओह्मियम जैसे स्टार्टअप्स उच्च जोखिम-उच्च लाभ देते हैं, जबकि L&T और रिन्यू स्थिर ग्रोथ। निवेश से पहले कंपनी फंडामेंटल्स, सरकारी पॉलिसी और ग्लोबल ट्रेंड्स जांचें। भारत सबसे सस्ता ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादक बनेगा, जो ऊर्जा स्वतंत्रता लाएगा। ये तीनों कंपनियां गेम बदलने को तैयार हैं अभी निवेश न करें तो मौका हाथ से निकल जाएगा। ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य है, और छोटी कंपनियां इसका इंजन।

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