फ्लैट प्लेट कलेक्टर (FPC) की पूरी जानकारी

फ्लैट प्लेट कलेक्टर (FPCs) का प्रयोग आवासीय एवं औद्योगिक दोनों ही क्षेत्रों में किया जाता है। इसके माध्यम से पानी को आसानी से पर्यावरण के अनुकूल रह कर गर्म किया जा सकता है।

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आज के समय में सौर ऊर्जा का प्रयोग करने के लिए अनेक प्रकार के उपकरणों को विकसित कर दिया गया है। जिनका प्रयोग विभिन्न अनुप्रयोगों में किया जा सकता है, एवं उनसे प्राप्त होने वाले लाभ को अर्जित किया जा सकता है। सौर ऊर्जा से संचालित होने वाले उपकरणों का प्रयोग कर के पर्यावरण के अनुकूल रहकर कार्य किया जाता है। ऐसे ही फ्लैट प्लेट कलेक्टर (FLAT PLATE COLLECTORS) एक सोलर उपकरण है। जिसके माध्यम से सौर ऊर्जा को तापीय (थर्मल) ऊर्जा में परिवर्तित करने का कार्य किया जाता है। इस लेख के माध्यम से फ्लैट प्लेट कलेक्टर की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

फ्लैट प्लेट कलेक्टर (FPC) की पूरी जानकारी
फ्लैट प्लेट कलेक्टर (FPC)

फ्लैट प्लेट कलेक्टर क्या है?

फ्लैट प्लेट कलेक्टर (FPC) ऐसे ही एक सोलर पैनल उपकरण है, जिसका प्रयोग सौर ऊर्जा से थर्मल ऊर्जा को उत्पन्न करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसके द्वारा संचालित किए गए तरल पदार्थ के रूप में पानी का प्रयोग कर के ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। सूर्य से प्राप्त होने वाली किरणों को ग्रहण करने के लिए फ्लैट प्लेट कलेक्टर लगाया जाता है, यह क्रियाशील माध्यम में ऊष्मा संचारित करने का कार्य करता है। फ्लैट प्लेट कलेक्टर वाले उपकरणों में औसतन तापमान की सीमा 100 डिग्री सेल्सियस तक होती है।

फ्लैट प्लेट कलेक्टर वाले उपकरणों में किए जाने वाले निवेश की लागत किफायती होती है। फ्लैट प्लेट कलेक्टर का प्रयोग आवासीय क्षेत्रों से लेकर व्यावसायिक क्षेत्रों में अनेक अनुप्रयोगों में किया जाता है। ऐसे उपकरणों के प्रयोग सामान्यतः सक्रिय हीटिंग, स्पेस हीटिंग, वाटर हीटिंग आदि के लिए किया जाता है।

फ्लैट प्लेट कलेक्टर कैसे काम करता है?

Flat plate collector के कार्य में ऊष्मीय ऊर्जा या ऊष्मा का स्थानांतरण सम्मिलित है। FPC के कार्य करने की प्रक्रिया को निम्न बिंदुओं के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:-

  • FPC के संचालन माध्यम में सूर्य की किरणों से प्राप्त होने वाली ऊष्मा का आदान-प्रदान किया जाता है।
  • इसमें सूर्य से प्राप्त होने वाली किरण अवशोषित प्लेट की सतह से टकराती है। तो सौर ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा में परिवर्तित हो जाता है।
  • ऊष्मा में बदलने के बाद सोलर कलेक्टर का तापमान बढ़ जाता है। तापमान बढ़ने पर यह आंतरिक रूप से भी गर्म होता है।
  • जब किसी प्रकार के तरल पदार्थ को सोलर कलेक्टर के अंदर से प्रवाहित किया जाता है, तो उस तरल पदार्थ का तापमान भी बढ़ जाता है। जिसका कारण अवशोषित कलेक्टर प्लेट से गर्मी का तरल पदार्थ में स्थानांतरित हो जाना है। चूंकि यह ऊष्मागतिकी के प्रथम एवं द्वितीय नियमों के सिद्धांतों पर काम करता है।1 
  • तरल पदार्थ इस ऊर्जा सिस्टम को आपूर्ति करने के लिए ऊष्मा को कलेक्टर से ऊष्मा एक्सचेंजर्स तक पहुँचाता है। ऐसे में सौर तापीय संग्राहक से अच्छा प्रदर्शन प्राप्त करने एवं ऊर्जा खपत को कम करने के लिए कलेक्टर को कम से कम संभव तापमान पर संचालित करना होता है।

फ्लैट प्लेट कलेक्टर उपकरणों के प्रकार 

FPC उपकरणों को ग्लेज (Glaze) एवं विन्यास (Configuration) के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है:-

  • ग्लेज के आधार पर दो प्रकार के ग्लेज्ड एवं अनग्लेज्ड पैनल FPC होते हैं:-
    • ग्लेज्ड पैनल- सामान्यतः इस प्रकार के FPC का प्रयोग आवासीय जल तापन सिस्टम में या अन्य प्रतिष्ठानों में किया जाता है। इनमें इंसुलेटेड पैनल होते हैं। जो ग्लेज कवरिंग करते हैं। सोलर प्लेट को इंसुलेशन प्रदान कर ये अवरक्त विकिरण को रोकने का कार्य करते हैं। ग्लेज़िंग पैनल के नीचे एक अवशोषक लगा होता है, जिसमें ऊष्मा हस्तांतरण के लिए द्रव प्रवाहित होता है।इसके संचालन में ऑपरेटिंग तापमान सामान्यतः 30 डिग्री से 60 डिग्री सेल्सियस के बीच होता है।
    • अनग्लेज्ड पैनल- ऐसे FPC उपकरण ग्लेज्ड नहीं होते हैं। ऐसे FPC की कीमत बहुत कम होती है, ये कम व्यापक होते हैं। ऐसे FPC का प्रयोग सामान्यतः स्विमिंग पूल हीटिंग सिस्टम में किया जाता है, ऐसे FPC को संचालित करने के लिए तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से कम होता है, कुछ देशों में ऐसे FPCs का प्रयोग गर्म पानी के हीटिंग सिस्टम के रूप में भी किया जाता है।
  • विन्यास (कॉन्फ़िगरेशन) के आधार पर भी दो प्रकार के सीरीज एवं पैरलल अवशोषित प्लेट FPC होते हैं:-
    • सीरीज अवशोषण प्लेट- इस प्रकार का FPC एकल सतत सर्किट से बना होता है, जिसमें बहने वाले द्रव की कम मात्रा एवं उच्च तापीय उछाल होता है, ऐसे FPCs का कार्य प्रदर्शन अच्छा होता है। इनका प्रयोग भी आसानी से किया जा सकता है।
    • समानांतर अवशोषित प्लेट- इस प्रकार के FPCs का प्रयोग क्षैतिज एवं ऊर्ध्वाधर दोनों दिशाओं में स्थापित कर के किया जा सकता है। समानांतर अवशोषित पलट का कार्य प्रदर्शन इस पर निर्भर करता है कि उसमें लगे कलेक्टर के अंदर ब्रांचों के माध्यम से संचलन तरल पदार्थ की अधिक मात्रा के साथ कलेक्टर का तापमान भी बड़ी मात्रा में फैलाया जा सकता है।

फ्लैट प्लेट कलेक्टर के कम्पोनेंट्स

FPCs के लिए कम लागत वाली, ऑप्टिकली कुशल चयनात्मक कोटिंग्स की जरूरत होती है। जिस से इनके द्वारा सही से कार्य किया जाता है। एक सामान्य फ्लैट-प्लेट कलेक्टर निम्नलिखित घटकों से बना होता है:-

  • अवशोषण प्लेट (Absorbing Plate)– इसके द्वारा कलेक्टर के अंदर सौर विकिरण को रोकने का कार्य किया जाता है। यह सौर ऊर्जा को तापीय ऊर्जा में परिवर्तित करने में महत्वपूर्ण होता है। यह प्लेट सामान्यतः तांबे की पन्नी से बनी होती है, तांबा उत्कृष्ट तापीय कंडक्टर होता है, यह प्लेट गहरे रंग की होती है। क्योंकि गहरे रंग की वस्तुएं किसी भी अन्य रंग की तुलना में सौर विकिरण को बेहतर ढंग से अवशोषित करती है। अवशोषण करने वाली प्लेट में नलिकाओं का एक ग्रिड होता है, जिसके द्वारा ऊष्मा स्थानांतरण तरल रूप से बहता है। इन प्लेट को गहरे रंग (काला) करने के निम्न तरीके हैं:-
    • विद्युत रासायनिक निक्षेपण (Electrochemical Depositions) या धातु आक्साइड से युक्त पेन पर आधारित चयनात्मक ट्रीटमेंट किया जाता है। ऐसे में सौर विकिरण का उच्च अवशोषण एवं कम ऊष्मा उत्सर्जन होता है।
    • ऊष्म ब्लैक पैंट की एक पतली फिल्म उच्च तापमान का प्रतिरोध करती है।
  • ग्लेज़िंग कवर– इस कवर द्वारा सोलर कलेक्टर को बाह्य पर्यावरणीय परिस्थितियों से अलग रखा जा सकता है, जिस से यह सोलर विकिरण को गुजरने दिया जाता है। यह कवर लगभग 4 mm मोटी कांच की एक शीट से बना होता है। ग्लेज्ड FPCs में ही यह कवर होता है। इसे बनाने का कारण हीट लॉस को न्यूनतम करना है। यह शीट ही ग्रीनहाउस प्रभाव का कारण बनती है।
  • इंसुलेशन– इंसुलेशन को सामान्यतः सिंथेटिक प्लेट फोम शीतर (पॉलीयूरेथेन, फाइबरग्लास,साइनाइड्स आदि) से निर्मित किया जाता है। इंसुलेटर कलेक्टर गर्मी के नुकसान को कम करता है। मुख्यतः यह कलेक्टर प्लेट से बाहर की ओर गर्मी से होने वाले नुकसान को कम कर देता है। जो पैनल के पीछे एवं किनारे की ओर होता है।
  • ट्यूब– FPCs में कलेक्टर प्लेट में ट्यूब का ग्रिड होता है, जो ऊष्मा स्थानांतरण तरल के संचलन में रहता है। इनके द्वारा कलेक्टर में इनलेट से आउटलेट तक बहने वाले द्रव को संचालित करने में सहायता की जाती है।
  • हाउसिंग– सोलर कलेक्टर के अन्य घटकों को रखने का कार्य हाउसिंग में होता है। इसके बंद करने वाले भाग को एल्युमिनियम प्रोफाइल के द्वारा बनाया जाता है, जो असेंबली के प्रतिरोध की गारंटी प्रदान करता है। इसके निचले भाग में कंडेनसेट को बाहर करने के लिए छेद होते हैं।

FPCs का आकार देखें

किसी FPCs का प्रयोग उसकी आवश्यकताओं के आधार पर किया जाता है। इसका आकार प्रयोग होने वाली आवश्यकताओं एवं तापमान पर निर्भर करता है। सामान्यतः 4 x 6.5 फीट, 4 x 8 फीट, 4 x 10 फीट के फ्लैट प्लेट कलेक्टर का प्रयोग किया जाता है। इनका वजन बहुत अधिक हो सकता है। एक वर्ग फीट के FPC प्रतिदिन 60 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान होने पर 10 लीटर तक पानी गर्म करने में सक्षम होता है। इसे मानक गर्म पानी भंडारण टैंक की क्षमता के समान कहा जाता है। एक बार सही से स्थापना हो जाने के बाद कम खर्चे पर इनका रखरखाव किया जा सकता है।

बिना कवर के FPCs की जानकारी

आज के समय में अधिकांश कवर वाले FPCs उपलब्ध रहते हैं। बिना कवर वाले कलेक्टर ज्यादा लाभप्रद होते हैं। बिना कवर वाले FPCs में एक अवशोषक पदार्थ होता है, यह प्लास्टिक ट्यूब, रबर, पॉलीप्रोपाइलीन आदि से बना होता है। ऐसे सोलर कलेक्टर को आसानी से स्थापित किया जाता है, ये बहुत किफायती होते हैं। इसकी विशेषताएं इस प्रकार रहती हैं:-

  • बिना कवर वाले FPCs जंग-प्रतिरोधक होते हैं। इनसे सीधे हीटिंग सिस्टम की सुविधा प्राप्त हो सकती है। इनका प्रयोग स्विमिंग पूल में देखा जा सकता है।
  • बिना कवर वाले FPCs का विन्यास लचीला होता है। इसलिए इन्हें किसी प्रकार के सतह पर रखा जा सकता है। इस प्रकार के कलेक्टर कार्य करने में कुशल होते हैं।

FPCs के क्या लाभ होते हैं?

फ्लैट प्लेट कलेक्टर का प्रयोग करने से होने वाले लाभ इस प्रकार हैं:-

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  • यह पर्यावरण के अनुकूल कार्य करने वाला सिस्टम है, इस से किसी भी प्रकार के प्रदूषण को उत्पन्न नहीं किया जाता है, एवं यह एक स्वच्छ सिस्टम है।
  • इसके द्वारा प्रयोग होने वाली ऊर्जा प्राकृतिक एवं नवीकरणीय है। इसलिए इनके प्रयोग को बढ़ावा दिया जाता है।
  • यह उपकरण सभी दिशाओं से प्रत्यक्ष ऊर्जा को संग्रहीत करने की सुविधा प्रदान करता है। साथ ही यह तापीय विकिरण को फैलता है।
  • FPCs का निर्माण आसान है, इन्हें स्थापित भी आसानी से किया जा सकता है। इन्हे स्थापित करने में पैनल के झुकाव एवं अभिविन्यास में एक माउंटिंग संरचना में तय किया जाता है, ऐसा करने से वे सूर्य की अधिकतम रोशनी को प्राप्त करते हैं। इस प्रकार के उपकरण के रखरखाव में बहुत कम खर्चा होता है। इनके कार्यप्रदर्शन की लाइफ-साइकिल भी अधिक होती है।
  • फ्लैट प्लेट कलेक्टर का प्रयोग कर के कम तापमान पर भी अधिक ऊर्जा का उत्पादन किया जा सकता है।

फ्लैट प्लेट कलेक्टर से संबंधित पूछे जाने वाले प्रश्न एवं उत्तर

फ्लैट प्लेट कलेक्टर (FPCs) क्या होते हैं?

फ्लैट प्लेट कलेक्टर (FPCs) के द्वारा सौर ऊर्जा को थर्मल ऊर्जा में बदलने का कार्य किया जाता है। इसके माध्यम से पानी को गर्म किया जाता है।

FPCs को कहाँ स्थापित किया जा सकता है?

FPCs को घर की छत पर आसानी से लगाया जा सकता है। यदि छत पर लगाने का स्थान न हो तो इसे 45 डिग्री के कोण पर माउंटिंग किट की सहायता से स्थापित किया जा सकता है। इसे स्थापित करने में सूर्य की दिशा एवं स्थापना का कोण सही होना चाहिए।

FPCs का दोष क्या है?

FPCs का मुख्य प्राथमिक दोष ऑप्टिकल सांद्रता का अभाव होना है, ऐसे में ऊष्मा ऊर्जा विलुप्त होती है।

फ्लैट प्लेट कलेक्टर के क्या उपयोग होते हैं?

फ्लैट प्लेट कलेक्टर (FPCs) का प्रयोग स्विमिंग पूल के पानी को गर्म करने, स्पेस हीटिंग, आवासीय या औद्योगिक क्षेत्रों में द्रव पदार्थों को गर्म करने के लिए किया जाता है।

फ्लैट प्लेट कलेक्टर के कार्य करने में विज्ञान के किन नियमों का पालन करता है?

फ्लैट प्लेट कलेक्टर के कार्य करने में ऊष्मागतिकी के प्रथम एवं द्वितीय नियमों के सिद्धांतों का पालन करता है।

FPCs में किस भाग को काले रंग के साथ लेपित किया जाता है?

FPCs में अवशोषक को काले रंग के साथ लेपित किया जाता है।

वर्तमान समय में टेक्नोलॉजी में तेजी से विकास हो रहा है, नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों से लाभ प्राप्त कर पर्यावरण को भी स्वच्छ रखा जा सकता है। FPCs ऐसा ही एक सोलर उपकरण है, जिसके द्वारा ऊष्मा परिवर्तन का कार्य किया जा सकता है। गर्म पानी की आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए ऐसे उपकरणों का प्रयोग किया जा सकता है। छोटे एवं बड़े सभी प्रकार के क्षेत्रों में इस उपकरण का प्रयोग किया जाता है। यह कम कीमत में स्थापित किया जा सकता है। जिसका प्रयोग लंबे समय तक प्राप्त किया जा सकता है।

  1. ऊष्मप्रवैगिकी के नियम ऊर्जा, तापमान और एन्ट्रॉपी जैसी मूलभूत भौतिक राशियों को परिभाषित करते हैं। ↩︎

यह भी देखें:सौर ऊर्जा: एक स्वच्छ भविष्य की किरण

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